NASA – अमेरिकी अंतरिक्ष program

नासा (National Aeronautics and Space Administration) अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी है।


अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम :

नासा दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय अंतरिक्ष एजेंसी है। जिसके अभियानो की सूचि बहुत लम्बी है। मोटे तोर पर नासा के कार्येक्रमों को तीन खण्डों में समझा जा सकता है। 1. मंगल सम्बंधित अभियान। 2. चन्द्रमा सम्बंधित अभियान। 3. विविध अभियान।


मंगल सम्बंधित अभियान :

क्यूरिऑसिटी मिशन :-  अभियान का नाम एमएसएल : मार्स साइंस लेबोरेटरी है। एमएसएल अभियान के तहत नासा ने 2011 में क्यूरिऑसिटी रोवर को मंगल के लिए प्रक्षेपित किया। 2012 में क्यूरिऑसिटी रोवर मंगल की सतह पर उतरा।  मिशन के लक्ष्य:- मंगल की सतह पर जीवन के अस्तित्व की खोज करना। पानी व जीवन के लिए अन्य आवश्यक तत्वों की खोज। मानवीय अभियान भेजने के लिए भूगर्भिक व विकिरण स्तर जैसे कारकों के आंकड़े संकलित करना।

क्यूरिऑसिटी रोवर :– यंत्र और उपयोग

केमिन ( CHEMIN ) पूरा नाम केमिस्ट्री एंड मिनरलॉजी इंस्ट्रूमेंट :-  मंगल की मृदा के विश्लेषण के लिए : विश्लेषण से पता लगा कि मंगल की सतह पर मिले खनिज हवाई के ज्वालामुखी क्षेत्र की मृदा से काफी मिलते हैं।

टीएलएस (TLS) पूरा नाम टयूनेबल लेजर स्पेक्ट्रोमीटर :- मीथेन के अस्तित्व की खोज में उपयोगी, यह यंत्र जीवन के सूक्ष्म संकेत खोजने के लिए तैयार किया गया है। इस यंत्र ने मंगल के वातावरण में मीथेन की मौजूदगी के सबूत जुटाए हैं।

गेल क्रेटर:-  यह मंगल की सतह पर मौजूद जवालामुखी विस्फोट से बना बड़ा गड्ढा है। क्यूरिऑसिटी रोवर इसी गड्ढे में उतरा है। इस गड्ढे में कभी पानी हुआ करता था इसके सबूत क्यूरिऑसिटी को मिले हैं।

ब्लैक ब्यूटी :-  यह 320 Kg की अंतरिक्षीय चट्टान है जो मंगल से धरती पर आकर गिरी मानी जाती है। यह 2011 में मोरक्को के सहारा रेगिस्तान में मिली। इस चट्टान में मंगल की अन्य किसी भी चट्टान से ज्यादा पानी के सबूत मिले हैं। इस चट्टान से मंगल के उदभव संबंधी नए और ज्यादा सटीक रहस्यों के खुलासे की संभावनाएं है।

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चन्द्रमा सम्बंधित अभियान :

एब(Ebb) और फ्लो(Flow), सेली राइड:- नासा ने दो अंतरिक्ष यान एब और फ्लो, मूनकैम अभियान के लिए भेजे गए। इस अभियान के तहत इन्हें चन्द्रमा की कक्षा में परिभ्र्रमण करना था। दोनों यानों की स्थापन तुंगता (installation) बिगड़ने और ईंधन खत्म हो जाने के कारण अभियान पूरा करने योग्य नहीं रह गए। (Due to the failure of the installation of both the ships and the fuel is exhausted, the operation ceased to be completed.) नासा ने 2012 में इन्हें चन्द्रमा की सतह से टकरा कर उतार दिए। चन्द्रमा की सतह पर जहाँ इन यानों को उतारा गया उस जगह को अमेरिका की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री सेली के. राइड का नाम दिया गया।

ग्रेल(GRAIL):-  पूरा नाम ग्रेविटी रिकवर एंड इंटीरियर लेबोरेटरी। इस अभियान का लक्ष्य चन्द्रमा की भूगर्भिक संरचना व गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का अध्यन करना था।

एलक्रॉस(LCROSS) :- पूरा नाम लूनर क्रेटर ऑब्जरवेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट। इस अभियान से चन्द्रमा की मिट्टी में पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।

मूनकैम(MoonKAM) :-  पूरा नाम मून- नॉलेज अक्वायर्ड बाय मिडिल स्कूल स्टूडेंट। यह चन्द्रमा की तस्वीरें लेकर धरती पर भेजता है।  जो मिडिल स्कूल तक के छात्रों को अध्ययन के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं।

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विविध अभियान :

कैसिनी(Cassini) :-  शनि के उपग्रह टाइटन पर पानी की मौजूदगी के सबूत ढूंढने भेजा गया अभियान था केसिनी। टाइटन हमारे सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा व शनि के 7 उपग्रहों में यह सबसे बड़ा है।

ड्रैगन स्पेस एक्स :-  यह एक निजी कंपनी ‘स्पेस एक्स’ द्वारा निर्मित कैप्सूल है। इसने अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक भोजन व अन्य सामान पहुँचाया है। इसे फालकन-9 राकेट से प्रक्षेपित किया गया।

फायर फ्लाई क्यूबसेट :-  यह सुदूर अंतरिक्ष में प्रकाशिकीय घटनाओं को दर्ज करने के लिए छोड़ा गया छोटा उपग्रह है। इससे स्थलीय गामा विकिरण के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

केपलर टेलीस्कोप :-  यह नासा की अंतरिक्ष वेधशाला है। इससे अंतरिक्ष में धरती जैसे ग्रहों को खोजने में मदद मिलेगी।

मर्करी मैसेंजर :-  सौर मंडल में सूर्य के निकटस्त ग्रह बुध पर भेजा गया अभियान है। नासा ने इस यान से बुध ग्रह पर पानी और बर्फ होने की सूचनाएं दी है।

नूस्टार(NuSTAR) :-  नूस्टार, पूरा नाम न्यूक्लिअर स्पेक्ट्रोस्कोपिक टेलेस्कोप ऐरे है। यह अंतरिक्ष में स्थित एक्स-रे टेलिस्कोप है। नासा ने इसे पेगसस अभियान के तहत प्रक्षेपित किया था। यह शक्तिशाली एक्स-रे किरणों से ब्लेकहोल, खंडित तारों और सुपरनोवा के अवशेषों को खोजता है।

प्रेडिक्कस :-  धरती के करीबी क्षेत्रों, चन्द्रमा और मंगल पर विकिरण संबंधी पूर्वानुमानों के लिए इंटरनेट आधारित उपकरण है। भविष्य में चन्द्रमा और मंगल पर मानव अभियान भेजने के लिए इससे बहुत सूक्ष्म सूचनाएं उपलब्ध होंगी।


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